हमारे धर्म और पूजा पद्धतियों में विभिन्न प्रकार के रीति रिवाज और प्रथाएं होती हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि शिव पूजा में शंख का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता? (puja shankh price) शंख का प्रयोग अक्सर अन्य देवताओं की पूजा में होता है, जैसे विष्णु, गणेश और देवी पूजा में लेकिन शिव पूजा में इसका प्रयोग क्यों नहीं किया जाता यह जानना बहुत जरूरी है।
शंख और शिव पूजा का सम्बन्ध
शिव भगवान को महादेव कहा जाता है और वे संहारक के रूप में प्रसिद्ध हैं। वे ध्यान और साधना के देवता हैं (original shankh online) और उनके पूजा में विशेष प्रकार की साधना की आवश्यकता होती है। शिव पूजा में शंख का प्रयोग न करने के पीछे कुछ धार्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं जिनका पालन हम आज भी करते हैं।
- शिव का संबंध शांति से है
शिव जी का स्वरूप शांति, ध्यान और तपस्या का प्रतीक है। (original blowing shankh price) उनके पूजा में शंख की ध्वनि का प्रयोग शांति की भावना को बाधित कर सकता है क्योंकि शंख की ध्वनि तेज और उग्र होती है जो ध्यान की स्थिति में व्यवधान उत्पन्न कर सकती है। शिव पूजा में शांति और एकाग्रता बनाए रखना जरूरी होता है और शंख की आवाज से यह बाधित हो सकती है।
- शिव की पूजा में गंधर्व वाद्य का महत्व
शिव पूजा में मुख्य रूप से ताम्बूल, धूप, दीप और चंदन का प्रयोग किया जाता है। इनका उद्देश्य शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना होता है। (original dakshinavarti shankh price) जबकि शंख का प्रयोग ज्यादातर विष्णु पूजा में किया जाता है क्योंकि यह उनके साथ जुड़ा हुआ वाद्य है। शिव की पूजा में गंधर्व वाद्य जैसे मृदंग तबला आदि का महत्व ज्यादा होता है।
- धार्मिक दृष्टिकोण






कुछ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शंख का उपयोग विशेष रूप से विष्णु पूजा में होता है, क्योंकि वह समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ था और विष्णु के साथ जुड़ा हुआ है। (original valampuri sangu) शिव भगवान के लिए शंख का प्रयोग न करने का कारण यह भी हो सकता है कि शंख का संबंध अन्य देवताओं के साथ ज्यादा माना जाता है जबकि शिव का स्वरूप साकार और निराकार दोनों है इसलिए उनका पूजा विधि भी अलग होती है।
- प्राकृतिक और तात्त्विक दृष्टिकोण
शिव जी की पूजा में प्राकृत तत्वों का बहुत महत्व है। पानी मिट्टी बेल पत्र दूध और गंगाजल जैसे साधारण तत्वों का प्रयोग शिव पूजा में ज्यादा किया जाता है। (valampuri sangu original price) शंख का संबंध समुद्र से है और यह शुद्ध नहीं माना जाता क्योंकि इसे समुद्र से निकाला जाता है जो कुछ धार्मिक दृष्टिकोण से असंस्कारित माना जाता है।
निष्कर्ष
अंत में, यह कहा जा सकता है कि शिव पूजा में शंख का प्रयोग न करने के पीछे धार्मिक सांस्कृतिक और तात्त्विक कारण हैं। (valampuri sangu small size price) शिव भगवान के पूजा में शांति , ध्यान और साधना का विशेष महत्व है और शंख की आवाज इन तत्वों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए अन्य देवताओं की पूजा में शंख का प्रयोग किया जाता है लेकिन शिव पूजा में इसका प्रयोग नहीं किया जाता है।